दुकान के बोर्ड पर लिखा सोने का भाव गहनों की कीमत का सिर्फ़ एक हिस्सा है। बाक़ी हिस्सा मेकिंग चार्ज, कभी-कभी वेस्टेज चार्ज, नग की कीमत और GST होता है। हर हिस्सा कैसे निकलता है, यह समझ लें तो दुकानों की तुलना करना आसान हो जाता है।
गहनों के बिल में क्या-क्या होता है
- सोने की कीमत: सोने का नेट वज़न गुणा उस शुद्धता के लिए दुकान का प्रति ग्राम भाव।
- मेकिंग चार्ज: डिज़ाइन और कारीगरी के लिए जौहरी का चार्ज।
- वेस्टेज या वैल्यू एडिशन (VA): कुछ दुकानें अलग से एक प्रतिशत जोड़ती हैं, ख़ासकर दक्षिण भारत में। कई दुकानें इसे मेकिंग चार्ज में ही शामिल कर लेती हैं।
- नग और दूसरी चीज़ें: इनकी कीमत अलग से, वज़न या नग के हिसाब से लगती है।
- हॉलमार्किंग चार्ज: हर गहने पर एक छोटा चार्ज।
- GST: कुल रक़म पर 3%।
मेकिंग चार्ज कैसे बताया जाता है
दुकानें मेकिंग चार्ज तीन में से किसी एक तरीके से बताती हैं:
- सोने की कीमत का प्रतिशत, जैसे 12%। यह सबसे आम तरीका है।
- प्रति ग्राम तय रक़म, जैसे ₹800 प्रति ग्राम।
- हर गहने पर एक तय रक़म, आमतौर पर छोटे या हल्के गहनों पर।
मेकिंग चार्ज दुकान और डिज़ाइन के हिसाब से बहुत बदलता है। सादी चेन और सादी चूड़ियों पर आमतौर पर सबसे कम चार्ज होता है, और बारीक, हाथ के बने या एंटीक फ़िनिश वाले काम पर सबसे ज़्यादा। सोने का भाव लगभग हर जगह एक जैसा होता है, इसलिए दुकानों की कीमत में ज़्यादातर फ़र्क मेकिंग चार्ज से आता है।
एक उदाहरण
मान लीजिए 22 कैरेट की एक चेन का नेट वज़न 10 ग्राम है और दुकान का 22 कैरेट भाव ₹13,000 प्रति ग्राम है।
- सोने की कीमत: 10 ग्राम × ₹13,000 = ₹1,30,000
- 12% मेकिंग चार्ज: ₹15,600
- कर योग्य राशि: ₹1,45,600
- 3% GST: ₹4,368
- कुल: ₹1,49,968, यानी सब मिलाकर लगभग ₹14,997 प्रति ग्राम।
अगर वही दुकान ₹800 प्रति ग्राम मेकिंग चार्ज ले, तो मेकिंग चार्ज ₹8,000 और कुल ₹1,42,140 होगा। अपने आँकड़े बिल कैलकुलेटर में डालकर देखें।
GST कैसे लगता है
बना-बनाया गहना ख़रीदने पर पूरे बिल पर 3% GST लगता है, मेकिंग चार्ज समेत। अगर जौहरी आपके दिए सोने से गहना बनाता है (जॉब वर्क), तो नियम अलग हैं, इसलिए ऐसे में दुकान से पूछें कि बिल कैसे बनेगा।
नग सोना नहीं है
नग, मोती, लाख और मीनाकारी का वज़न अलग से होना चाहिए और उस पर सोने का भाव कभी नहीं लगना चाहिए। BIS के दिशानिर्देशों के अनुसार बिल में सोने का नेट वज़न लिखा होना ज़रूरी है, इसलिए देखें कि सोने की कीमत कुल वज़न पर नहीं, नेट वज़न पर लगी हो।
"ज़ीरो मेकिंग चार्ज" ऑफ़र
त्योहारों पर अक्सर मेकिंग चार्ज कम या माफ़ करने के ऑफ़र आते हैं। ये सही भी हो सकते हैं, पर जाँच लें:
- उस दिन दुकान किस भाव पर सोना दे रही है, और बाज़ार भाव से उसकी तुलना
- कहीं उसकी जगह वेस्टेज या VA चार्ज तो नहीं जोड़ दिया गया
- ऑफ़र सिर्फ़ कुछ डिज़ाइनों पर तो नहीं है
बड़े ऑफ़र के बजाय, सब मिलाकर प्रति ग्राम आख़िरी कीमत की तुलना करें।
मेकिंग चार्ज और गहना बेचना
बाद में गहना बेचने या बदलने पर दुकानें सोने की कीमत देती हैं, मेकिंग चार्ज की नहीं, और आमतौर पर गलाने और जाँच के लिए कुछ प्रतिशत काटती भी हैं। ख़रीदने से पहले बदलने और वापस ख़रीदने की शर्तें पूछें, और पुराने सोने के कैलकुलेटर से देखें कि पुराने सोने की कीमत कितनी बनती है।
काउंटर पर पूछने लायक सवाल
- इस शुद्धता के लिए आज आपका प्रति ग्राम भाव क्या है?
- मेकिंग चार्ज कितना है, और यह प्रतिशत में है या प्रति ग्राम?
- क्या वेस्टेज या VA चार्ज अलग से है?
- नग के बिना सोने का नेट वज़न कितना है?
- क्या हॉलमार्किंग चार्ज अलग से लिखा है?
- बाद में बदलने या बेचने पर आप कितना काटेंगे?
स्रोत
- भारतीय मानक ब्यूरो, हॉलमार्किंग योजना का विवरण (Brief on Hallmarking Scheme), 1 अक्टूबर 2026 को अपडेट (बिल में क्या लिखा होना चाहिए)
- केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड, GST पोर्टल (GST दरें)